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अब रिलीज से पहले राजस्थान देखेगा भंसाली की फिल्म पद्मावती

rajasthan minister support to karni sena
16 March, 2017 11:37:05 PM

मुंबई: फिल्म पद्मावती का विरोध और विवाद अब तक हिंदू संगठनों और करणी सेना तक था। अब राजस्थान सरकार भी इसके विरोध में उतर आई है। सरकार ने फिल्म के प्रदर्शन से पहले एक शर्त रख दी है। सरकार की मांग है कि फिल्म में इतिहास के साथ तोड़-मरोड़ की गई या नहीं, इसकी जांच हो और जांच भी फिल्म प्रमाणन बोर्ड या फिर कोई सरकारी एजेंसी करे। 

गौरतलब है कि राजे सरकार ने पहले तो फिल्म की राजस्थान में शूटिंग और प्रदर्शन पर रोक का सरकारी बयान जारी किया। लेकिन जैसे ही राजधर्म और सरकार की छवि का अहसास हुआ, राजे सरकार अपने ही आदेश से पलट गई। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अरुण चतुर्वेदी ने बुधवार को राष्ट्रीय करणी सेना के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्हें यकीन दिलाया कि फिल्म की न राजस्थान में शूटिंग होगी न ही रीलीज। 

सरकार ने गिरफ्तारी तो दूर पिटाई की फुटेज होने के बावजूद करणी सेना के खिलाफ केस तक दर्ज नहीं किया। इसके उलट सरकार के मंत्री और बीजेपी नेता भंसाली के खिलाफ खड़े नजर आए। केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह ने तो करणी सेना की इस गुंडागर्दी को भी जायज ठहरा दिया। दूसरा मौका तब आया जब चितौड़ किले में घुसकर करणी सेना ने पद्मिनी के महल में ऐतिहासिक 200 साल पुराना शीशा तोड़ दिया। जिसके बारे में दावा किया जा रहा था कि अलाउद्दीन खिलजी ने पद्मिनी का चेहरा इसी आईने में देखा। करणी सेना के तोड़फोड़ की जिम्मेदारी लेने के बावजूद केस भी दर्ज नहीं हुआ।

तीसरा मौका तब आया जब आरक्षण की मांग को लेकर लाठियों के साथ करणी सेना ने जयपुर में प्रदर्शन किया। तब भी सरकार के उर्जा मंत्री पुष्पेंद्र सिंह ने प्रदर्शनकारियों के बीच आकर भरोसा दिलाया कि पद्मावती बिना प्री स्क्रिनिंग के रीलीज नहीं होगी। जौहर और राजामौली भी भंसाली के समर्थन में आये हैं। जौहर ने कहा, हमारे प्रतिष्ठित और शानदार देश के नागरिक, फिल्म निर्माता और इंसान होने के नाते यह काफी दुखद है कि हमें ऐसी किसी घटना का सामना करना पड़ता है। मेरे समर्थन संजय के साथ है।

राजामौली ने कहा कि भाषण की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है और एक कलाकार के नाते भंसाली को उनका सपना पूरा करने की आजादी होनी चाहिये। मोतवानी ने भी घटना की निंदा करते हुये कहा कि फिल्म निर्माताओं की सृजनात्मक आजादी पर रोक नहीं लगायी जानी चाहिये। फिल्म निर्देशक अर्पणा सेन ने भी इस घटना की निंदा करते हुये इसे शर्मनाक बताया है।
 


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