main page

'धूम 2' की 14वीं सालगिरह पर राइटर विजय कृष्ण आचार्य ने कही यह बड़ी बात

24 November, 2020 04:00:44 PM

ब्लॉकबस्टर ''धूम 2'' की 14वीं सालगिरह पर राइटर विजय कृष्ण आचार्य भारत को उसकी सबसे बड़ी फ्रेंजाइजी देने के बारे में बता रहे हैं।

नई दिल्ली। 'धूम' (dhoom) और 'धूम 2' (dhoom 2) के राइटर तथा धूम: 3 के डाइरेक्टर विजय कृष्ण (विक्टर) आचार्य ने खून की रफ्तार बढ़ा देने वाली इन एंटी-हीरो फिल्मों के साथ भारत को उसकी सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी प्रदान की है। ये तीनों एंटरटेनर असली विजुअल स्पेक्टेकल साबित हुईं। रितिक रोशन और ऐश्वर्या राय बच्चन स्टारर ब्लॉकबस्टर 'धूम 2' की 14वीं सालगिरह पर विक्टर बता रहे हैं कि इन फिल्मों के साथ उन्होंने किस तरह से भारत में स्लिक एक्शन एंटरटेनर का एक नया जॉनर ही रच डाला था!

'धूम 2' की 14वीं सालगिरह पर राइटर विजय कृष्ण आचार्य ने कही यह बड़ी बात
धूम की सफलता ने हमें बता दिया था कि भारत में ज्यादा कूल स्टायल वाली एक्शन फिल्म की काफी संभावना है। हालांकि आदि की एकदम स्पष्ट राय थी कि महज किसी फ्रेंचाइजी के खयाल की खानापूर्ति के लिए हमें कभी कोई फिल्म नहीं बनानी चाहिए। हमने शुरू से अंत तक इसी सिद्धांत पर टिके रहने की कोशिश की। फिल्म के हर विभाग में 'धूम 2' कुछ पायदान ऊपर ही थी। मेरा मानना है कि हम एक ऐसा स्क्रीनप्ले तैयार करने में कामयाब रहे थे, जो आगे और ज्यादा जानने के लिए आपके मन में उत्सुकता जगाए रखता है। सभी किरदार और उनमें छोटी-मोटी अनोखी चीजें जोड़ते हुए मुझे निजी तौर पर वाकई बड़ा मजा आया था।“-  कहना है विक्टर का, जिनकी फिल्मों ने बॉक्स-ऑफिस पर पीछा करने के लिए इंडस्ट्री के सामने नए बेंचमार्क स्थापित किए हैं।


 
देश के युवाओं को 'धूम 2' इतनी ज्यादा पसंद आने के बारे में विक्टर की राय है, “मुझे लगता है कि 'धूम 2' के स्क्रीनप्ले का जादू इस हकीकत में छिपा था कि यह एक एक्शन फिल्म फ्रेंचाइजी की अगली फिल्म थी, जो केंद्रीय रूप से लव स्टोरी में बदल गई थी। इस खासियत ने फिल्म को इस जॉनर की हर सीमा से परे कर दिया।“- वह बताते हैं।उनका आगे कहना है- “मुझे याद है कि जब धूम रिलीज हो चुकी थी और जब 'धूम 2' की घोषणा हुई तो सबको लगा कि धूम 1 में बाइकों की धूम थी, इसलिए अगली फिल्म में कारों की धूम मचेगी। कुछ हद तक यह स्वाभाविक भी जान पड़ता था। वैसे हकीकत तो यह है कि आप कोई भी फिल्म बेजान चीजों के बारे में नहीं बनाते। बाइकों और एक्शन की भरमार के बावजूद हमारी कोशिश हमेशा यही होती है कि फिल्म में एक अहसास भरा जाए। आप हमेशा कोई न कोई भावना व्यक्त करने का प्रयास करते हैं, भाव कुछ भी हो सकते हैं। अपनी लव स्टोरी की बदौलत 'धूम 2' सबके दिलों से जुड़ गई थी।“


 
'धूम 2' ने दर्शकों के सामने रितिक और ऐश्वर्या के रूप में एक ऐसी सुपर-हॉट जोड़ी पेश की, जिस पर वे फिदा हो गए थे। रितिक ने सुपर कूल चोर आर्यन का किरदार निभाया था और सुनहरी के किरदार में ऐश्वर्या ने गजब ढाया था। इन किरदारों को गढ़ने के पीछे छिपी अपनी रचनात्मक रणनीति के बारे में पूछने पर विक्टर खुलासा करते हैं, “ऐश्वर्या के किरदार ने सभी को थोड़ा चौंका दिया था। फिल्म में मुझे एक ऐसी लड़की चाहिए थी, जो रहती तो शहर के एक गरीब और बदनाम इलाके में है लेकिन उसके सपने बहुत बड़े हैं। उसके हालात जो भी रहे हों, लेकिन वही उसे आगे का रास्ता दिखाते हैं। यह कैरेक्टर, जिसकी जिंदगी बड़ी दिलचस्प है और जो एक छोटी-मोटी चोरनी है, बड़ा दिलकश था और लोग उसे आसानी से अपना शिकार भी बना सकते थे। ऐसा हिंदी फिल्मों की शानदार दुनिया में ही संभव है कि आपका किरदार दिन में एक डांसर हो और रात में चोरी करे!” 


 
वह आगे कहते हैं, “ऐश्वर्या ने इस तरह का काम पहले कभी नहीं किया था। उन्होंने कहीं ज्यादा पारंपरिक, ज्यादा जटिल और ज्यादा नाटकीय किरदार अदा किए थे। किसी एक्टर की खुशमिजाजी हमेशा आकर्षक होती है। तो, फिल्म में रितिक और ऐश्वर्या के बीच का रेखागणित काफी अहम था, या कह लीजिए कि एक माइलस्टोन था। मेरे विचार से भारत के मेनस्ट्रीम एंटरटेनमेंट की दुनिया में यह एक बहुत अच्छी और सॉलिड जोड़ी बनी थी, जो समय की कसौटी पर खरी उतरी।“ रितिक वाले कैरेक्टर के बारे में खुलासा करते हुए विक्टर बताते हैं, “एक बार फिर रितिक का कैरेक्टर उसी परंपरा का था, जिसे हम धूम का एंटी-हीरो मानते हैं। मेरे सामने एक ऐसे व्यक्ति का खाका था, जो समाज में मौजूद तो है, लेकिन हाशिए पर पड़ा हुआ है। हां, वह एक अपराधी है लेकिन वह एक ऐसा व्यक्ति भी है जो केवल खास चीजों की तलाश में रहता है। वह चोरी की कला में माहिर है। ये तमाम बातें उस किरदार को गढ़ने के काम आईं और यह चीज एक्टर को कोई नायाब चीज साकार करने में मदद करती है।”


 
वह आगे कहते हैं, “दरअसल आर्यन एक कलेक्टर (संकलनकर्ता) है, और इसमें उसे चरम सुख मिलता था। मजे की बात यह है कि अपनी चोरी की कला के जरिए आखिरकार वह जो चीज चुराने में कामयाब होता है, वह है किसी का दिल और इसी के साथ उसकी आपराधिक जिंदगी समाप्त हो जाती है। तो बिना कुछ कहे बगैर उसके किरदार का एक किस्म से उद्धार भी हो जाता है। मुझे लगता है कि रितिक और ऐश्वर्या दोनों इस फिल्म का एक बेमिसाल पहलू थे और दोनों ही बड़े जबरदस्त तरीके से अपने-अपने किरदारों में ढल गए थे। मुझे कहना पड़ेगा कि रितिक ने जिस तरह अपना रोल निभाया था, वह वाकई बेहद खास था। इसके पहले उनको इस तरीके से कभी भी पेश नहीं किया गया था, और लोगों ने उन पर बस अपना प्यार बरसाया था।“


dhoomdhoomdhoom writer vijay krishna acharyaaditya choprayash raj films
loading...