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कई राज्यों में टैक्स फ्री हुई 'द कश्मीर फाइल्स' तो ‘झुंड’ की प्रोड्यूसर को हुई आपत्ति, पूछा- आखिर सरकार किस आधार पर इसे कर मुक्त कर रही है?

Updated 19 March, 2022 05:36:32 PM

अनुपम खेर स्टारर फिल्म ''द कश्मीर फाइल्स'' सिनेमाघरों में खूब धमाल मचा रही है। फिल्म कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचारों की सच्चाई को बयां करती है, जिसे देख लोग काफी इमोशनल हो रहे हैं। फिल्म ने रिलीजिंग के 9 दिनों में अच्छी कमाई की है। वहीं कई राज्यों में इसे टैक्स फ्री भी कर दिया गया है।  अमिताभ

बॉलीवुड तड़का टीम. अनुपम खेर स्टारर फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' सिनेमाघरों में खूब धमाल मचा रही है। फिल्म कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचारों की सच्चाई को बयां करती है, जिसे देख लोग काफी इमोशनल हो रहे हैं। फिल्म ने रिलीजिंग के 9 दिनों में अच्छी कमाई की है। वहीं कई राज्यों में इसे टैक्स फ्री भी कर दिया गया है।  अमिताभ बच्चन की फिल्म झुंड की निर्माता सविता राज हिरेमठ ने इस बात से हैरानी जताई है कि उनकी फिल्म को टैक्स-फ्री क्यों नहीं किया गया। 

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सविता का कहना है कि जहां द कश्मीर फाइल्स एक महत्वपूर्ण फिल्म है, वहीं झुंड भी कम नहीं है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, "मैंने हाल ही में कश्मीर फाइल देखी और कश्मीरी पंडितों के पलायन की कहानी के रूप में यह दिल दहला देने वाली है और एक ऐसी कहानी है जिसे बताया जाना चाहिए। यह कश्मीरी पंडितों के लिए एक अच्छी आवाज है! लेकिन झुंड के निर्माता के रूप में, मैं हैरान हूं। आखिरकार, झुंड भी एक महत्वपूर्ण फिल्म है और इसकी कहानी और एक बड़ा संदेश है जिसे दर्शकों से जबरदस्त प्रशंसा और जुबानी मिली है।"

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बता दें, अमिताभ बच्चन स्टारर झुंड 4 मार्च को रिलीज की गई थी। इसके एक हफ्ते बाद कश्मीरी पंडितों के पलायन पर आधारित द कश्मीर फाइल्स सिनेमाघरों में धमक पड़ी। फिल्म को पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के कई नेताओं सहित केंद्र सरकार से समर्थन मिला, जिन्होंने फिल्म की प्रशंसा की। अनुपम खेर, दर्शन कुमार, मिथुन चक्रवर्ती और पल्लवी जोशी की भूमिकाओं वाली ‘द कश्मीर फाइल्स’ को उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, कर्नाटक, त्रिपुरा और गोवा जैसे राज्यों में टैक्स फ्री घोषित कर दिया गया।


ऐसे में सविता ने आपत्ति जताते हुए लिखा, "मैं यह जानना चाहती हूं कि आखिर सरकार किस आधार पर इसे कर-मुक्त बनाकर, सोशल मीडिया के माध्यम से इसका समर्थन करती है और कार्यालयों को फिल्म का प्रदर्शन करने या आधे दिन की छुट्टी देने के लिए कहती है। आखिरकार, झुंड में एक ऐसा विषय भी है जो हमारे देश के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। झुंड न केवल जाति और आर्थिक असमानता के बीच असमानता के बारे में बात कर रहा है बल्कि समाज के निचले तबके को उनकी सफलता की कहानी खोजने का एक तरीका भी दिखाता है।”

 

 
 


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