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Movie Review: जहीर-प्रनूतन की लव स्टोरी है 'नोटबुक'

29 March, 2019 11:29:32 AM

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के बैनर तले बनी फिल्म ''नोटबुक'' आज रिलीज हो गई है। इस फिल्म में जहीर इकबाल और प्रनूतन बहल लीड रोल में है। फिल्म की कहानी और उसका संदेश कश्मीर के उन परिवारों के लिए है, जो बताता है कि बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए न कि गन।

मुंबई: बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के बैनर तले बनी फिल्म 'नोटबुक' आज रिलीज हो गई है। इस फिल्म में जहीर इकबाल और प्रनूतन बहल लीड रोल में है। फिल्म की कहानी और उसका संदेश कश्मीर के उन परिवारों के लिए है, जो बताता है कि बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए न कि गन। फिल्म का निर्देशन नितिन कक्कड़ ने किया है। नोटबुक में छह बच्चे भी हैं, जिनके सारे फिल्म की कहानी चलती है और सभी ने बहुत ही अच्छा और नेचुरल अभिनय किया है।

 

Bollywood Tadkaनोटबुक इमेज, नोटबुक फोटो, नोटबुक पिक्चर


कहानी

 फिल्म नोटबुक की कहानी कश्मीर की एक झील के बीचों बीच बने हाउस-बोट स्कूल की है। बिना बिजली, पानी और मोबाइल के नेटवर्क के बीच इस स्कूल में कभी एक टीचर यानि फिरदौस(प्रनूतन बहल) बच्चों को घर से बुला बुला कर पढ़ाती थीं और उनके चले जाने के बाद एक कबीर(जहीर इकबाल) को वहां भेजा जाता है। बच्चों की कॉपी-किताबों के साथ वहां एक नोटबुक होती है, जो फिरदौस की होती हैं। इस नोटबुक में फिरदौस ने अपने सबसे निजी विचार लिखे हैं। इस नोटबुक को पढ़ने के बाद कबीर बिना कभी मिले ही फिरदौस के प्यार में पड़ जाता है। 

 

Bollywood Tadkaनोटबुक इमेज, नोटबुक फोटो, नोटबुक पिक्चर


डायरेक्शन


फिल्म में एक प्यारी लव स्टोरी दिखाई गई है, जो आज के समय में दिखनी मुश्किल है। कैसे किसी से बिना मिले सिर्फ उसकी किताब पढ़ें एक लड़के को लड़की से प्यार हो जाता है। दोनों ही एक्टर्स ने अपनी बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है। लेकिन फिल्म का स्क्रीनप्ले थोड़ा कमजोर पड़ गया। हालांकि कश्मीर में हुई फिल्म की शूटिंग इस फिल्म को और खूबसूरत बना देता है। यह फिल्म साल 2014 में आई थाई फिल्म 'द टीचर्स डायरी' का अडैप्टेशन है। हालांकि फिल्म में जहीर इकबाल और प्रनूतन बहल एक ताजी हवा के झौंके की तरह सामने आते हैं। 

 

Bollywood Tadkaनोटबुक इमेज, नोटबुक फोटो, नोटबुक पिक्चर


यह कपल फिल्म के अंत तक एक-दूसरे से नहीं मिल सकता है लेकिन जब यह हाई-ड्रामा शुरू होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। फिल्म के लेखकर दराब फारुकी, पायल अशर और शरीब हाशमाी ने कश्मीरी युवाओं के सामाजिक ताने-बाने के आसपास कहानी लिखी है, जो जाहिर तौर पर पॉजिटिव है लेकिन न तो फिल्म का स्क्रीनप्ले और नही इसके डायलॉग उस तरह का ड्रामा क्रिएट कर पाते हैं जैसी इससे उम्मीद की गई थी। 

 

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एक्टिंग

जहीर की डायलॉग डिलीवरी और फेस के एक्स्प्रेशन काफी दमदार है। पहली फिल्म के मुताबिक उन्होंने काफी अच्छा काम किया है। वहीं प्रनूतन इस फिल्म में ग्लैमरस नहीं बल्कि एक सिंपल और खूबसूरत लड़की के किरदार में दिखीं। उन्होंने फिल्म में अपनी एक्टिंग और खूबसूरत अदाओं से दिल जीत लिया है।

 

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म्यूजिक


एक लव स्टोरी वाली फिल्म होने के नाते इस फिल्म के गानें और म्यूजिक में और अच्छा काम किया जा सकता था। फिल्म के 2 गानें 'बुमरो' और 'नहीं लगदा' के अलावा बाकी गानें कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाए।
 


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