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Movie Review: एजुकेशन सिस्टम की पोल खोलती है ‘सेटर्स’

05 May, 2019 04:07:31 PM

बॉलीवुड एक्टर श्रेयस तलपडे और आफताब शिवदासानी की फिल्म ''सेटर्स'' रिलीज हो गई है। इस फिल्म में इनके अलावा सोनाली सहगल और इशिता दत्ता लीड रोल में है। सेटर्स का मतलब होता है, सेटिंग करने वाला। लेखक-निर्देशक अश्विनी चौधरी की ''सेटर्स'' में एजुकेशन सिस्टम में सेंध लगाने वाले सेटर्स की कहानी को दर्शाया गया है।

मुंबई: बॉलीवुड एक्टर श्रेयस तलपडे और आफताब शिवदासानी की फिल्म 'सेटर्स' रिलीज हो गई है। इस फिल्म में इनके अलावा सोनाली सहगल और इशिता दत्ता लीड रोल में है। सेटर्स का मतलब होता है, सेटिंग करने वाला। लेखक-निर्देशक अश्विनी चौधरी की 'सेटर्स' में एजुकेशन सिस्टम में सेंध लगाने वाले सेटर्स की कहानी को दर्शाया गया है। 

 

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कहानी

फिल्म की कहानी बनारस, जयपुर, दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों के इर्दगिर्द घूमती है, जहां बनारस का बाहुबली भैयाजी (पवन मल्होत्रा) अपूर्वा (श्रेयस तलपड़े) और अपने दूसरे गुर्गों (जीशान कादरी, विजय राज, मनु ऋषि, नीरज सूद) के साथ मिलकर शिक्षा तंत्र में दीमक लगाने का काम करता है। अपूर्वा की अगुवाई में रेलवे, बैंकिंग, टीचरी आदि के एग्जाम्स पेपर्स को इतनी चतुराई और हाईटेक अंदाज में लीक किया जाता है कि किसी को कानों- कान खबर नहीं होती। भैयाजी अपने गिरोह के साथ बैंकिंग के पेपर्स लीक करने की प्लानिंग कर रहे होते हैं कि एसपी आदित्य (आफताब शिवदासानी) को एक टीम गठित करके इस गिरोह का पर्दाफाश करने की जिम्मेदारी दी जाती है। एक जमाने में आदित्य और अपूर्वा गहरे दोस्त हुआ करते थे, मगर फिर हालात कुछ ऐसे बनते हैं कि आदित्य पुलिस और अपूर्वा चोर बन जाता है। आदित्य एजुकेशन सिस्टम के इस घपले को सामने लाने के लिए ईशा (सोनाली सहगल), अंसारी (जमील खान) और दिबांकर (अनिल मांगे) जैसे बागी पुलिस वालों की टीम बनाता है। उधर अपूर्वा एजुकेशन सिस्टम में घुसपैठ करने के साथ-साथ भैयाजी की बेटी प्रेरणा (इशिता दत्ता) के प्यार में पड़ जाता है, मगर तब तक पुलिस और चोरों के बीच चूहे-बिल्ली का खेल शुरू हो चुका है। 

 

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डायरेक्शन

निर्देशक अश्विनी चौधरी ने कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स के पेपर लीक होने की प्रक्रिया को बहुत ही रोचक अंदाज में दर्शाया है। उन्होंने पेपर लीक और नकल करवाने के सभी हाईटैक तरीकों का इस्तेमाल किया, जिसके कारण दर्शक कहानी से बंधा रहता है। इस कहानी को उन्होंने पुलिस इन्वेस्टिगेशन के साथ जोड़कर थ्रिलर बना दिया है। रियल लोकेशंस पर शूट की गई यह फिल्म कहानी को बल देती है। हालांकि हर बार स्कैम करनेवाला गिरोह पुलिस की जांबाज और एक्सपर्ट टीम को अंगूठा दिखा जाता है। निर्देशक के रूप में वे कुछ ट्रैक्स को विस्तार देने से चूक गए हैं। जैसे अपूर्वा और प्रेरणा की लव स्टोरी, भैयाजी और अपूर्वा के बीच की खुंदक। क्लाइमेक्स को वे और बेहतर बना सकते थे। 

 

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एक्टिंग

श्रेयस तलपड़े अपनी कॉमिक इमेज से हटकर एक अलग अंदाज में नजर आए हैं और उन्होंने अपनी बोली और अभिनय के साथ अपनी भूमिका को विश्वसनीय बनाया है। आफताब शिवदासानी को एक अरसे बाद हैंडसम और गंभीर पुलिसवाले की भूमिका में देखना अच्छा लगा है। विजय राज अपनी भूमिकाओं को हर बार एक नया आयाम देते हैं और इस बार भी वह कामयाब रहे हैं। इशिता दत्ता और सोनाली सहगल जैसी नायिकाओं के हिस्से में कुछ खास करने जैसा नहीं था। पवन मल्होत्रा, जीशान कादरी, जमील खान, मनु ऋषि, नीरज सूद, अनिल मांगे जैसे कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है। 


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