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MOVIE REVIEW: डर के साथ-साथ हंसाती भी है स्त्री

31 August, 2018 10:43:23 AM

फिल्म स्त्री आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। ये एक हॉरर कॉमेडी फिल्म है। डायरेक्टर अमर कौशिक ने फिल्म के माध्यम से डायरेक्शन में डेब्यू किया। मशहूर फिल्ममेकर राज और डीके की जोड़ी ने एक कहानी लिखी और दिनेश विजान के प्रोडक्शन में उसका निर्माण क‍िया है।

मुंबई: फिल्म स्त्री आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। ये एक हॉरर कॉमेडी फिल्म है। डायरेक्टर अमर कौशिक ने फिल्म स्त्री के माध्यम से डायरेक्शन में डेब्यू किया। मशहूर फिल्ममेकर राज और डीके की जोड़ी ने एक कहानी लिखी और दिनेश विजान के प्रोडक्शन में उसका निर्माण क‍िया है। इस फिल्म में श्रद्धा एक डरावनी भूतनी के किरदार में है।

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स्त्री फिल्म कहानी :

फिल्म की कहानी चंदेरी नाम के एक गांव में बुनी गई है जहां अचानक पुरुष रहस्यमयी ढंग से गायब होने शुरू हो जाते हैं। खबर उड़ जाती है कि स्त्री नाम की एक चुड़ैल है जो इन पुरुषों को गायब कर रही है। फिल्म में विकी (राजकुमार राव) अपने दोस्त बिट्टू (अपारशक्ति खुराना) और जना (अभिषेक बनर्जी) के साथ रहता है। विकी की कपड़े सिलने की दुकान है। फिल्म में चंदेरी के रहने वाले रुद्र (पंकज त्रिपाठी) के आते ही बहुत सारे ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं। रुद्र इन तीनों दोस्तों को चंदेरी पुराण और उसके पीछे की सच्चाई के बारे में बताता है। इसी दौरान विकी को श्रद्धा को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है। गांव की परिस्थिति और गड़बड़ होने लगती हैं, जब पता चलता है कि वहां स्त्री का आगमन होता है, जो सिर्फ पुरुषों को गायब करती है, स‍िर्फ उनके कपड़े रह जाते हैं. आखिरकार यह कौन स्त्री है और पुरुषों को वह क्यों गायब करती है, यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।


स्त्री फिल्म डायरेक्शन:

फिल्म की कहानी दिलचस्प है। स्क्रीनप्ले भी अच्छा लिखा गया है। फिल्म का डायरेक्शन अच्छा है और लोकेशन बड़ी कमाल की है, जिसकी वजह से एक पल में आपको डर भी लगता है और दूसरे पल हंसी भी आती है। कई बार तो ऐसा होता है कि किरदार डरते रहते हैं और आप पेट पकड़कर हंसते रहते हैं। फिल्म का ट्विस्ट भी कमाल का है। पंकज त्रिपाठी ने बहुत ही उम्दा अभिनय किया है, वही राजकुमार राव ने एक बार फिर से बता दिया कि उन्हें अच्छा एक्टर क्यों कहा जाता है। अभिषेक बनर्जी और अपारशक्ति खुराना ने भी सहज अभिनय किया है, इसी के साथ श्रद्धा का काम भी ठीक है। फिल्म की अच्छी बात इसकी रफ्तार है, जो कि आपको बोर नहीं करती। कहानी के दौरान कुछ अहम मुद्दों की तरफ भी ध्यान आकर्षित करती है। अमर कौशिक का डायरेक्शन बहुत बढ़िया है।

 

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स्त्री फिल्म कमज़ोर कड़ियां:

रिलीज से पहले फिल्म के गीत हिट नहीं हो पाए, इसका खामियाजा शायद मेकर्स को ओपनिंग के लिए उठाना पड़ सकता है, लेकिन कहानी में दम है, जिसकी वजह से वर्ड ऑफ माउथ से फायदा मिलेगा। क्लाइमैक्स शायद सबको पसंद न अाए।


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