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MOVIE REVIEW: 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान'

movie review of thugs of hindostan
08 November, 2018 01:52:25 PM

मुंबई: बॉलीवुड एक्टर अामिर खान और अमिताभ बच्चन की फिल्म 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म का टीजर और ट्रेलर काफी भव्य रहा। पहली बार अमिताभ बच्चन और आमिर खान को एक साथ पर्दे पर देखने का मौका भी दर्शकों को मिला है। 


कहानी 

फिल्म की कहानी 1795 के भारत की है, जब भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी का राज था और बहुत सारे राज्य अंग्रेजों के हाथों में थे। लेकिन रौनकपुर एक ऐसा राज्य था जो अंग्रेजों की पकड़ से दूर था। वहां का सेनापति खुदाबख्श जहाजी (अमिताभ बच्चन) अपने मिर्जा साहब (रोनित रॉय) का और पूरे प्रदेश का ख्याल रखता था। किन्हीं कारणों से मिर्जा साहब की मृत्यु हो जाती है और उनकी बेटी जफीरा (फातिमा सना शेख) की पूरी जिम्मेदारी खुदाबख्श के हाथों में आ जाती है। इसी बीच, कहानी 11 साल आगे बढ़ती है और फिर फिरंगी मल्लाह (आमिर खान) की एंट्रहोती है, जो अपनी दादी की कसम खाकर किसी से कितना भी झूठ बोल सकता है। उसका मकसद सिर्फ एक ही होता है, पैसे कमाना। इसी बीच, खुदा बख्श और फिरंगी मल्लाह की मीटिंग होती है।  कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब ईस्ट इंडिया कंपनी का जनरल क्लाइव इन सब को बहुत परेशान करने लगता है। सुरैया (कैटरीना कैफ) अंग्रेजी शासकों का दिल बहलाने का काम करती है। कहानी में कई सारे मोड़ आते हैं और अंततः एक रिजल्ट आता है जिसे जानने के लिए फिल्म देखनी पड़ेगी।

 

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डायरेक्शन


फिल्म की कहानी दिलचस्प है, लेकिन निर्देशन कमजोर। कहानी की रफ्तार कई जगह सुस्त हो जाती है। इसे और बेहतर किया जा सकता था। हालांकि, जिस तरह से 17वीं शताब्दी को दर्शाया गया है, वह लाजवाब है। अमिताभ ने एक बार फिर से बेहतरीन अभिनय का किया है। आमिर खान ने दिल जीतने की पुरजोर कोशिश की है, जो मुकम्मल भी हुई है। दोनों के बीच फिल्माए गए बहुत सारे सीक्वेंस कमाल के हैं। फिल्म में फातिमा सना शेख ने सहज अभिनय किया है। साथ ही, फिल्म के बाकी किरदार जैसे रोनित रॉय और इला अरुण का काम भी अच्छा है। कैटरीना कैफ का रोल बहुत कम है, लेकिन ठीक है। वहीं, मोहम्मद जीशान अयूब ने बढ़िया अभिनय किया है।

 

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रिलीज से पहले फिल्म के वीएफएक्स के बारे में बात की जा रही थी कि उसमें कमी है। लेकिन फिल्म देखने के दौरान अच्छा वीएफएक्स देखने को मिलता है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी बढ़िया है। आमिर और मोहम्मद जीशान अयूब कई मौकों पर हंसाते हैं, जिसकी वजह से फिल्म देखने का मजा और बढ़ जाता है। रिलीज से पहले कहा जा रहा था कि आमिर का कैरेक्टर इंग्लिश फिल्म 'पाइरेट्स ऑफ कैरेबियन' से मिलता-जुलता है, जबकि इसे देखने के दौरान ऐसा बिल्कुल महसूस नहीं होता।


कमजोर कड़ियां 

फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी लेंथ है, जो काफी लंबी जान पड़ती है। इसे छोटा किया जाता तो फिल्म में और भी रोचक होती। फिल्म की रिलीज से पहले इसके गाने भी प्रचलित नहीं हो पाए हैं, जिसकी वजह से जो बज होना चाहिए था, वह नहीं बन पाया है। फिल्मांकन के दौरान बड़े-बड़े गाने दर्शाए गए हैं, जिन्हें छोटा किया जाना चाहिए था। क्लाइमैक्स और बेहतर हो सकता था। विजय कृष्ण आचार्य का निर्देशन कमजोर है। निर्देशन में धार से इस फिल्म को बचाया जा सकता था। फिल्म की कहानी भी ऐसी है जो शायद सभी को पसंद ना आए। खासतौर पर अंग्रेजी फिल्में देखने वाली ऑडियंस को फिल्म के इफेक्ट प्रभावित न कर पाएं।


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