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मुझे तीनों खान यानी शाहरुख, सलमान, आमिर चाहिएं: यामी

16 March, 2014 10:31:56 AM

छोटे पर्दे से अपने करियर की शुरूआत करने वाली यामी गौतम ने फिल्म ‘विकी डोनर’ से बॉलीवुड में एंट्री की और पहली ही फिल्म ने उन्हें हिट कर दिया। इसकी सुपर कामयाबी के बाद उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिले लेकिन उन्होंने केवल चुनिंदा फिल्में ही साइन कीं, क्योंकि उन्हें महज शो-पीस वाली भूमिकाओं से ऐतराज है और वह कुछ बड़ा हासिल करना चाहती हैं। फिलहाल उनकी चर्चा हालिया रिलीज फिल्म ‘टोटल सियापा’ को लेकर हो रही है। उनके हाथ में ‘एक्शन जैक्सन’ तथा ‘हमारा बजाज’ जैसी कुछ अन्य फिल्में भी हैं। पेश हैं उनसे एक बातचीत के अंश—

‘विकी डोनर’ के बाद इतना बड़ा गैप... ऐसा क्यों?
—मेरा मानना है कि फिल्मों में गैप से फर्क नहीं पड़ता केवल फिल्म अच्छी होनी चाहिए। दरअसल मैं चाहती थी कि आगे भी जो फिल्में करूं काफी सोच-समझ कर करूं। मेरे लिए मायने रखते हैं अच्छी स्क्रिप्ट और अच्छा डायरैक्टर। मैं यह कहने या चिल्लाने में यकीन नहीं रखती कि मेरे पास कितनी फिल्मों के ऑफर हैं। वह मुझे एक तरह का पब्लिसिटी स्टंट लगता है। खैर मेरी प्राथमिकता ऐसी फिल्में हैं जिनमें मनोरंजन के साथ-साथ  संदेश का भी पुट हो। भविष्य में इतना ज्यादा सोच-समझ कर फिल्में नहीं करूंगी क्योंकि ज्यादा चूजी होना भी ठीक नहीं।

हिंदी फिल्मों के बदले क्षेत्रीय फिल्मों को तरजीह देने की वजह क्या यही थी?
—बिल्कुल क्योंकि मैं सिर्फ पेड़ों के इर्द-गिर्द घूमने या शिफॉन की साड़ी पहन कर हीरो के संग रोमांस करने वालों में से नहीं हूं। इसी वजह से बॉलीवुड की मेनस्ट्रीम फिल्मों की बजाय रीजनल फिल्मों को भाव दे रही हूं। कन्नड़, तमिल, तेलुगू, मलयालम और पंजाबी फिल्मों ने मेरा काफी उत्साह बढ़ाया है।

‘टोटल सियापा’ में पंजाबी लड़की का किरदार निभाना कितना मुश्किल रहा?

—एक कलाकार में अगर प्रतिभा और लगन है तो उसके लिए यह बहुत मायने नहीं रखता कि वह किस प्रदेश का किरदार निभा रहा है। ‘विकी डोनर’ में मैंने बंगाली लड़की आशिमा का किरदार निभाया था जबकि मैं हिमाचल से हूं। ‘टोटल सियापा’ में पंजाबी लड़की का किरदार निभाना मेरे लिए इसलिए भी मुश्किल नहीं था क्योंकि मेरी फैमिली हमेशा से चंडीगढ़ में रही है इसलिए पंजाबी कल्चर से अच्छी तरह वाकिफ हूं। जबकि  ‘एक्शन जैक्सन’ में मेरा किरदार और भी अलग तरह का है।

कैसे किरदारों और फिल्मों को प्राथमिकता दे रही हैं?
—मैं अर्थपूर्ण फिल्में करना चाहती हूं, चाहे वह किसी भी तरह की क्यों न हो। मैं रोमांटिक, कॉमेडी, इमोशनल... हर तरह के किरदार निभाना चाहती हूं। अगर दमदार नैगेटिव रोल भी करने को मिले तो जरूर करूंगी। वैसे, आज बॉलीवुड में भी काफी अलग तरह की फिल्में बन रही हैं। 

‘विकी डोनर’ में आप हमेशा साड़ी  में लिपटी नजर आईं, जबकि बॉलीवुड ग्लैमर मांगता है। कैसे तालमेल बिठाएंगी?

—यही कहना चाहूंगी कि मेरे लिए स्किन शो कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन यह रोल की डिमांड होना चाहिए। अगर रोल के लिए इसकी जरूरत है तो ऐसा करने में कोई बुराई नहीं है। मेरा मानना है कि हरेक फिल्म और हर किरदार की अपनी एक खास डिमांड होती है।

बॉलीवुड में ‘खान्स’ के साथ काम करने से किसी एक्ट्रैस का कद और रुतबा बढ़ता है। आप किस खान के साथ काम करना पसंद करेंगी?
—मुझे तो तीनों खान यानी शाहरुख, सलमान और आमिर चाहिएं। मैं किसी एक खान के साथ नहीं बल्कि तीनों खान्स के साथ काम करना चाहती हूं क्योंकि तीनों बहुत ही सीनियर एक्टर हैं।

इंडस्ट्री में कम्पीटीशन या तुलना का भय भी सताता है?
—नहीं, क्योंकि मैं इंडस्ट्री की बाकी अभिनेत्रियों से खुद की तुलना नहीं करती और न ही किसी से अपनी प्रतियोगिता मानती हूं। मेरा काम करने का अपना तरीका है। उसे मैं काफी सम्मान देती हूं। मैं दूसरों की रफ्तार देख अपनी गति में परिवर्तन नहीं करती। हां हर चीज पर नजर जरूर रखती हूं।

भविष्य की क्या योजनाएं हैं?
—मैं लाइफ को कभी प्लान नहीं करती। अगर ऐसा होता तो मैं आज आई.ए.एस. अफसर होती क्योंकि मैं वही बनना चाहती थी और उसके लिए तैयारी भी कर रही थी लेकिन किस्मत यहां ले आई और मैं एक एक्ट्रैस बन गई। फिलहाल यही चाहती हूं कि अब जब यहां आ गई हूं तो आगे बढूं और पीछे मुड़कर न देखूं।
 


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