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बॉलीवुड में महज शो पीस बनना नहीं चाहती: कंगना

24 March, 2014 10:43:47 AM

मुंबई: पहले पर्दे पर दर्द भरी भूमिकाओं को साकार करने वाली कमसिन अभिनेत्री कंगना राणावत का फिल्मी सफर अब उस स्तर पर पहुंच चुका है, जहां उन्हें स्वयं को सिद्ध करने की जरूरत नहीं है। आज वह हिंदी फिल्मों की मुख्यधारा की अभिनेत्रियों में अपना स्थान सुरक्षित कर चुकी हैं। उन्हें अब छुई-मुई वाली भूमिकाएं नहीं बल्कि वूमन ओरिएंटेड फिल्में ऑफर की जा रही हैं। हालिया रिलीज एवं सुपरहिट ‘क्वीन’ उनकी ऐसी ही फिल्म है।  कंगना से हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

‘क्वीन’ ने आपको वाकई बॉलीवुड की रानी बना दिया। क्या कहेंगी?
—सच कहूं, तो मुझे अपनी फिल्म ‘क्वीन’ को लेकर पूरा भरोसा था कि यह हर वर्ग के लोगों को पसंद आएगी। इसकी कहानी और इसमें मेरा किरदार, दोनों ही मुझे बेहद पसंद आए थे, तभी मैंने इसमें काम करना स्वीकार किया था। इसमें मैंने ‘रानी’ नामक एक शर्मीली पंजाबन महिला की भूमिका निभाई है। रियल लाइफ में  भी मैं रानी जैसी और बहुत शर्मीली हूं।

‘क्वीन’ के साथ तो आप डायलॉग राइटर भी बन गईं?
—ऐसा आप शायद इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि ‘क्वीन’ के कई डायलॉग खुद मैंने लिखे हैं। दरअसल, इसके पीछे की वजह यह है कि इसमें मैंने छोटे शहर की और परिवार की देख-रेख में रहने वाली एक शर्मीली और सकुचाई लड़की का किरदार निभाया है। मैं खुद भी हिमाचल प्रदेश के मंडी जैसे छोटे शहर से हूं और मिडल क्लास फैमिली से ही ताल्लुक रखती हूं। ऐसे में मुझे इस रोल से कनैक्शन महसूस हुआ और इसी वजह से मैंंने अपने डायलॉग्स खुद लिखने का फैसला किया।

‘क्वीन’ फिर ‘रिवॉल्वर रानी’ और उसके बाद ‘दुर्गा रानी सिंह’... यानी पूरी तरह से ही ‘रानी’ बनने का इरादा है?
—देखिए, अब मैं सिर्फ शो पीस वाले किरदार नहीं करना चाहती। 26 की उम्र में 16 साल की दिखने का क्या मतलब? ज्यादातर फिल्मकार तो यही चाहते हैं कि हीरोइन सुंदर लगे और हीरो के चारों ओर चक्कर काटती रहे लेकिन ऐसी हीरोइन का कोई भविष्य नहीं। चार साल बाद उसे कोई नई उम्र की हीरोइन अवश्य ही रिप्लेस कर देती है। यही वजह है कि फिलहाल मैं ज्यादातर ऐसी फिल्मों में काम कर रही हूं जिनकी कहानी मेरे इर्द-गिर्द घूमती है।

तो क्या अब आप ग्लैमरस रोल नहीं करेंगी?
—मैंने ऐसा तो नहीं कहा! दरअसल, मेरे कहने का मतलब यह है कि बॉलीवुड में लंबी पारी खेलने के लिए महज शो पीस बनने से काम नहीं चलने वाला है। नए दौर में अब दर्शक सिर्फ टेलैंट को ही महत्व दे रहे हैं इसलिए चैलेंजिंग भूमिकाएं निभाए बिना कोई चारा नहीं। मैंने इस चैलेंज को पूरे मन से स्वीकार किया है इसीलिए ऐसी फिल्मों में काम करने को प्राथमिकता दे रही हूं जिनकी कहानियों के केंद्र में मुझे रखा गया है। वैसे भी मैंने छुई-मुई वाले किरदार काफी निभा लिए हैं अब बारी है मर्दाना किस्म के किरदारों की।


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