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‘गब्बर’ विलेन नहीं हीरो है

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15 April, 2015 01:07:38 AM

चंडीगढ़: 'गब्बर इज बैक' का शोले के गब्बर से कोई लेना-देना नहीं, केवल पीछे फिल्म चल रही थी उसमें गब्बर का नाम आया उसी आधार पर भ्रष्टाचार के खिलाफ लिखे पत्र में गब्बर शब्द का इस्तेमाल किया गया था, उसी के आधार पर इस फिल्म का नाम और फिल्म की शुरूआत की गई। शोले के गब्बर और इस गब्बर में फर्क यह है कि शोले का गब्बर विलेन था, जबकि इस फिल्म में वह हीरो है। यह बात चंडीगढ़ पहुंचे अभिनेता अक्षय कुमार ने ‘पंजाब केसरी’ के साथ विशेष बातचीत में कही। बातचीत के दौरान उन्होंने विभिन्न मुद्दों और अपनी निजी लाइफ से जुड़ी बातें भी शेयर की। 

सवाल :  गब्बर को नैगेटिव रोल के लिए जाना जाता है, आपने एक अच्छा संदेश देने वाली फिल्म को गब्बर का नाम क्यों दिया?  

जवाब : जमाना ऐसा हो गया है कि बुरे काम को रोकने के लिए बुरे काम का सहारा लिया गया है। गब्बर ऐसा नाम है, जिससे आज भी लोग डरते हैं। फिल्म की शुरूआत में ही मैं पुलिस कमिश्नर को एक पत्र लिखकर कहता हूं कि भ्रष्टाचार को रोको, वरना इसकी जिम्मेदार सरकार की होगी। जब इस स्क्रिप्ट पर काम किया जा रहा था तब टी.वी. पर शोले फिल्म चल रही थी और गब्बर का नाम सुनते ही दिमाग में यह आया कि क्यों न फिल्म का नाम गब्बर ही रख दिया जाए। 

सवाल : शोले में लाइन थी जब बच्चा नहीं सोता था, तब मां कहती थी गब्बर आ जाएगा, ऐसे ही इस फिल्म की क्या कोई टचिंग लाइन है, जो फिल्म की पहचान बनेगी?

जवाब : आई हेट सॉरी इस फिल्म की ऐसी लाइन है, जो फिल्म की पहचान बनेगी। फिल्म में मेरे साथ ऐसे बहुत से हादसे हुए जब एक राजनेता और बिल्डर सिर्फ यह कहकर कन्नी काट लेते हैं कि आई एम सॉरी। खुद सारी चीजें खराब करने के बाद लोग खुद के सुरक्षा कवच के रूप में जो सॉरी शब्द का इस्तेमाल करते हैं उससे मैं नफरत करता हूं। फिल्म के नाम गब्बर का शोले फिल्म के साथ कोई संबंध नहीं है। 

सवाल : इस फिल्म में कोई ठाकुर का रोल तो नहीं है? 

जवाब : शोले से इस फिल्म का कोई लेना-देना नहीं है। 

 

सवाल : फिल्म इंडस्ट्री में जैसे देओल फैमिली, कपूर फैमिली है, इसी तरह अक्षय, टि्ंवकल और अपनी सासू मां को लेकर किसी फिल्म में नजर आएंगे?

जवाब : नहीं मेरा ऐसा कोई भी इरादा नहीं है। मैं अपने परिवार को फिल्मों से दूर रखना चाहता हूं।

सवाल : 'गब्बर इज बैक' फिल्म क्या संदेश देती है?

जवाब : फिल्म साफ तौर पर यही कहती है कि अब तो भ्रष्टाचार को खत्म कर दो। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए खौफ का आसरा लिया गया है। फिल्म कहती है कि अगर लोगों को सीधी बात समझ नहीं आती है तो उन्हें डराएं और डराकर सही राह पर चलने के लिए मजबूर करें। मैं यह मानता हूं कि लोगों को डराने के लिए हिंसा को अपनाया गया है, परंतु फिल्म की कहानी में जब कोई विकल्प नहीं मिलता है तब ऐसा मजबूरी में करना पड़ा है। 

सवाल : बॉलीवुड की फिल्मों में धाक जमाने के बाद अक्षय क्या आप हॉलीवुड की फिल्मों में भी अब काम करने का इरादा रखते हैं?  

जवाब : बेशक मुझे 4 से 5 हॉलीवुड फिल्मों के प्रस्ताव मिल चुके हैं, परंतु मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है, क्योंकि मेरी इंगलिश इतनी भी अच्छी नहीं है कि हॉलीवुड की फिल्मों में डायलॉग बोल सकूं। मैं बॉलीवुड में बहुत ज्यादा खुश हूं। यहां मेरे अच्छे चाहने वाले हैं। मुझे आज भी यहां पर बहुत कुछ सीखने का मौका मिल रहा है तो मैं बाहर क्यों जाऊं? इतना कुछ मिलने के बाद अब मुझे कोई कारण नहीं मिलता कि मुझे हॉलीवुड में जाना चाहिए।  

सवाल : यूथ के लिए क्या मैसेज है?

जवाब : मैं जब दुबई में था तब मैंने देखा कि वहां रूल बहुत सख्त हैं। गलती करने पर वहीं पर फैसला लेकर मामले को खत्म कर दिया जाता है। भारत में ऐसा डर नहीं है, यहां पर भी ऐसा कानून होना चाहिए कि लोग उससे डरें।  

सवाल : गब्बर फिल्म के बारे में एक लाइन कहें?

जवाब : यह देखने लायक फिल्म है, जो भ्रष्टाचार से लडऩे का संदेश देती है। फिल्म कहती है अगर एक भी व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएगा तो वह अपने अंदर के गब्बर को बाहर निकालेगा। फिल्म को एक बार देखना बहुत ही जरूरी है। 

सवाल : फिल्म के अंदर आपको कितने विलेन के साथ लडऩा पड़ा?

जवाब : फिल्म में मुझे सिर्फ एक विलेन से लडऩा पड़ा। वह साऊथ इंडियन फिल्म के मशहूर विलेन सुमन हैं और इनके साथ मुझे पूरी फिल्म में लडऩा पड़ा। लड़ते-लड़ते बहुत मजा भी आया। मेरे अंदर के एक्शन अक्षय को बाहर आने का मौका मिला। सुमन मार्शल आर्टिस्ट हैं। 

सवाल :  सिक्योरिटी के लिए आप मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग स्कूल में दे रहे हो उस पर आपका क्या कहना है?  

जवाब : महिलाओं को सुरक्षा मिलनी बहुत ही जरूरी है। महिलाओं को सैल्फ डिफैंस के लिए मार्शल आर्ट की जरूरत है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए देश में दो मार्शल आर्ट ट्रेनिंग स्कूल खोल दिए गए हैं और 4 से 5 नए स्कूल खोलने की योजना है। स्कूल्स में अब तक 2000 महिलाओं को मार्शल आर्ट के गुर सिखाए जा चुके हैं। एक महीने में 300 महिलाओं को सैल्फ डिफैंस की टे्रनिंग नि:शुल्क दी जाती है। हम चाहते हैं कि लोग स्कूल के लिए जगह दें, ताकि महिलाओं को सशक्त बनाया जा सके। चंडीगढ़ में भी ऐसा स्कूल खोला जा सकता है। 


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